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Gopalganj News: राजद के पूर्व विधायक प्रेमशंकर यादव को मानहानि मामले में कोर्ट का समन, 2022 बयान पर कार्रवाई

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गोपालगंज व्यवहार न्यायालय ने राजद के पूर्व विधायक प्रेमशंकर यादव के खिलाफ मानहानि मामले में समन जारी किया है। मामला 2022 में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।

गोपालगंज/आलम की खबर: बिहार की राजनीति में एक बार फिर कानूनी कार्रवाई ने सियासी हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व विधायक Premshankar Yadav के खिलाफ गोपालगंज व्यवहार न्यायालय ने मानहानि मामले में समन जारी किया है। यह मामला वर्ष 2022 में दिए गए एक बयान से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसने उस समय भी राजनीतिक माहौल को काफी गर्म कर दिया था और अब अदालत के आदेश के बाद एक बार फिर इस पर चर्चा तेज हो गई है।

मामले की सुनवाई गोपालगंज व्यवहार न्यायालय के एसीजेएम-प्रथम न्यायालय में हुई, जहां न्यायाधीश गोपाल प्रसाद ने मामले का संज्ञान लेते हुए पूर्व विधायक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि निर्धारित तिथि पर उपस्थिति अनिवार्य है और अनुपस्थित रहने की स्थिति में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

पूरा विवाद वर्ष 2022 का बताया जा रहा है, जब बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक रहे प्रेमशंकर यादव ने इंटरनेट मीडिया पर एक बयान जारी किया था। आरोप है कि उस बयान में उन्होंने नारायणी रिवर फ्रंट निर्माण कार्य को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे और तत्कालीन विधायक तथा वर्तमान शिक्षा मंत्री Mithilesh Tiwari पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया था। इसी बयान को लेकर बाद में कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।

इसके साथ ही आरोप यह भी लगाया गया कि उनके बयान में जातीय वैमनस्यता फैलाने वाली टिप्पणियां शामिल थीं, जिससे सामाजिक माहौल प्रभावित होने की बात कही गई। इन सभी आरोपों को आधार बनाते हुए शिक्षा मंत्री की ओर से गोपालगंज न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था। मामले की सुनवाई लंबे समय से चल रही थी और अब अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत समन जारी कर दिया है।

अदालत के इस निर्णय के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राजनीतिक बयानबाजी और चुनावी माहौल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर एक पूर्व विधायक और वर्तमान मंत्री से जुड़ा हुआ है।

सूत्रों के अनुसार अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोपी पूर्व विधायक को निर्धारित तिथि पर अदालत में उपस्थित होना होगा। यदि वे समय पर उपस्थित नहीं होते हैं तो न्यायालय आगे की प्रक्रिया को सख्ती से आगे बढ़ा सकता है। यह आदेश आने के बाद कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में प्रवेश कर गई है।

शिक्षा मंत्री के अधिवक्ता राजेश पाठक ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए समन जारी किया है और आरोपी को सदेह उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है और अदालत के आदेश का सम्मान किया जाना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद गोपालगंज जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोग इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी मामला मान रहे हैं, जो आने वाले समय में और भी बड़ा रूप ले सकता है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों का असर स्थानीय राजनीति पर भी पड़ सकता है, खासकर जब मामला सार्वजनिक बयान और गंभीर आरोपों से जुड़ा हो।

दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यह मामला केवल बयानबाजी का परिणाम है और इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाना चाहिए। वहीं विरोधी पक्ष इसे गंभीर आरोपों से जुड़ा मामला बता रहा है और अदालत के निर्णय को महत्वपूर्ण मान रहा है।

फिलहाल अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख निर्धारित कर दी है और सभी की नजर अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पूर्व विधायक अदालत में उपस्थित होते हैं या नहीं और मामले में आगे क्या मोड़ आता है।

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